- धुलेंडी के साथ उज्जैन में शुरू हुआ गणगौर पर्व, महिलाएं 16 दिनों तक करेंगी पूजा; राजस्थान से मंगवाई जाती हैं ड्रेस
- चिंतामन गणेश मंदिर में दूसरी जत्रा, हजारों श्रद्धालु पहुंचे दर्शन के लिए; किसानों ने नई फसल भगवान को अर्पित की
- महाकाल मंदिर में तड़के भस्म आरती: भांग-चंदन और सिंदूर से सजा बाबा का दिव्य रूप, मोगरा-गुलाब के पुष्पों से हुआ दिव्य श्रृंगार
- उज्जैन में शीतला माता पूजन का उत्साह, मंदिरों में उमड़ी महिलाओं की भीड़; एक दिन पहले तैयार किया जाता है भोजन
- महाकाल मंदिर में टीवी अभिनेत्री कनिका मान ने किए दर्शन, भस्म आरती में हुईं शामिल
चैत्र मास की पहली जत्रा शुरू, चिंतामण गणेश मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब; प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन स्थित प्रसिद्ध श्री चिंतामण गणेश मंदिर में चैत्र मास के साथ ही जत्राओं का सिलसिला शुरू हो गया है। परंपरा के अनुसार चैत्र माह के प्रत्येक बुधवार को यहां विशेष जत्रा आयोजित की जाती है। इस वर्ष की पहली जत्रा बुधवार से प्रारंभ हुई, जिसमें सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी।
पंचामृत अभिषेक से हुई शुरुआत
चैत्र माह के पहले बुधवार को तड़के 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान श्री गणेश का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद उनका भव्य श्रृंगार कर विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। जत्रा के अवसर पर मंदिर परिसर में दर्शन के लिए सुबह से ही लंबी कतारें दिखाई दीं। अनुमान है कि शयन आरती तक हजारों भक्त भगवान के दर्शन के लिए पहुंचेंगे।
पांच बुधवारों तक चलेगा आयोजन
इस बार चैत्र मास में कुल पांच जत्राएं आयोजित की जाएंगी। आगामी जत्राएं 11 मार्च, 18 मार्च, 25 मार्च और 1 अप्रैल को होंगी। 1 अप्रैल को इस श्रृंखला का समापन होगा।
भक्तों की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा सहज दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
मनोकामना पूर्ति से जुड़ी आस्था
मंदिर के पुजारी जयंत शर्मा के अनुसार, चैत्र मास की शाही जत्रा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस अवसर पर भगवान चिंतामण गणेश के दर्शन करने और प्रार्थना करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
नई फसल अर्पित करने की परंपरा
एक अन्य परंपरा के तहत किसान अपनी नई उपज—विशेषकर गेहूं और चने की फसल—बेचने से पहले भगवान को अर्पित करने मंदिर पहुंचते हैं। इस समय फसल पक चुकी होती है, और श्रद्धालु इसे भगवान को समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।